राजनांदगांव : मोती तालाब में मर रही हैं मछलियां दुर्गंध से लोगों का जीना हुआ दूभर…
अंबागढ़ चौकी , प्रचण्ड गर्मी व शरीर को झुलसा देने वाली धूप का असर केवल मनुष्यों पर ही नहीं बल्कि जलचरों पर भी पड़ने लगा है। नगर के मध्य में स्थित मोती तालाब का पानी इन दिनों इतना गर्म हो रहा है कि तालाब की मछलियां मरने लगी हैं। पिछले एक सप्ताह से तालाब की मछलियां मर कर तालाब में उफल रही हैं। मृत मछलियों से उठने वाले दुर्गंध के चलते भारी नागरिक परेशान हैं।
नगर के वार्ड 14 में निवास करने वाले सेवानिवृत्त प्राचार्य गौरीशंकर यादव, पूर्व पार्षद साधना सिंह, सुनीता निषाद, कली यादव, कविता ठाकुर, लक्ष्मी कोमरे, विजयशंकर खंडेलवाल, राजकुमार, प्रीति निषाद, रमोतिन, खोमिन, तरूणा मालेकर ने नगर पंचायत से शिकायत की है कि नगर के मोती तालाब का पानी बहुत कम हो गया है। ऐसे में भीषण गर्मी व तापमान के उच्च स्तर आने से तालाब की मछलिया अपने ही आप मर रही हैं।
इन मरी हुई मछलियों से उठने वाले दुर्गंध से तालाब के आसपास निवास करने वालों सुकुन छिन गया है। दुर्गंध के कारण लोगों को खाना, पीना और सोना हराम हो गया है। नागरिकों को संक्रामक बीमारी का भय सता रहा है। नागरिकों ने नगर पंचायत अध्यक्ष अनिल मानिकपुरी व सीएमओ विजय पांडेय से इसकी शिकायत करते हुए इस समस्या के त्वरित निराकरण कराने की मांग की है। नागरिकों की मांग है कि तालाब से मरी हुई मछलियों को तुरंत निकालकर नगरीय निकाय सीमा से बाहर किया जाए। इसके अलावा तालाब को जल स्रोतों के माध्यम से पानी से भरा जाए।
सुशासन तिहार में हुई शिकायत: मोती तालाब में तापमान बढ़ने से मछलियों का मरने का मामला सुशासन तिहार में भी उठ गया है। मंगलवार को नगरीय निकाय में आयोजित हुए सुशासन तिहार के दूसरे शिविर में यह मामला वार्ड वासियों के द्वारा उठाया गया। नागरिकों ने जल्द निराकरण करने की मांग रखी।
निरीक्षण करने पहुंचे अफसर व जनप्रतिनिधि मोती तालाब में मछलियां मरने की शिकायत मिलते ही नगर पंचायत तत्काल हरकत में आ गया है। नपं अध्यक्ष मानिकपुरी ने मौके में पहुंचकर तालाब का निरीक्षण करते हुए आसपास के निवासियों से चर्चा की। नपं अध्यक्ष ने मौके में ही सीएमओ को इस संदर्भ में तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिए। सफाई अमले ने काम शुरू कर दिया है। मछली पालन करने वाले ठेकेदार को तालाब से मरी हुई मछलियों को निकालकर इसे नगर सीमा से दूर ले जाकर डिस्पोजल करने कहा गया है। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर मोती तालाब को आसपास के जल स्रोतों से भरने का निर्देश दिया।



